Gout in Hindi – गठिया रोग के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

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गाउट क्या है? (What is Gout?)

Gout Meaning in Hindi – अचानक जोड़ों में तेज दर्द होना, जोड़ों में लालिमा और कोमलता यानी टेंडरनेस तथा पैर के अंगूठों के जोड़ों में दर्द आदि गाउट की पहचान होती है। गाउट या गठिया का एक जटिल रूप होता है जो किसी क भी प्रभावित कर सकता है। पुरुषों को इस तरह के गठिया होने की अधिक संभावना होती है, लेकिन रजोनिवृति के बाद महिलाओं को भी गाउट हो सकता है।

What-is-Gout

साथ ही गाउट अटैक अचानक हो सकता है और कई बार आधी रात में। इसकी वजह से आपकी नींद खुल सकती है और आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपके पैर में आग लगी है। वहीं इसके प्रभाव से आपके जोड़ों का गर्म होना, सूजन आना शामिल है। यहां तक कि आपके लिए बेड शीट का भार भी असहनीय हो जाते हैं। हालांकि गाउट का ट्रीटमेंट किया जा सकता है और दोबारा गाउट (What is Gout?) होने के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

क्या है यूरिक एसिड बढ़ने के कारण?

गाउट शराब, ड्रग्स, स्ट्रेस या अन्य बीमारियों के अत्यधिक सेवन की वजह से हो सकता है। पहला यूरिक एसिड अटैक आमतौर पर 3 से 10 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है, यहां तक कि बिना इलाज के भी। लेकिन हां इस पुष्टि करना महत्वपूर्ण है कि इसे फिर से होने से रोकने के लिए लाफस्टाइल में बदलाव किया जाना चाहिए। अगली जब्ती महीनों या सालों बाद भी हो सकता है।

गाउट के लक्षण (Symptoms of gout in Hindi)

Symptoms-of-gout

ऐसा जरूरी नहीं कि गाउट की समस्या (Gout Problems) आपकी बॉडी के किसी एक ही हिस्से पर हो, ये आपकी बॉडी के किसी भी हिस्से को अपना शिकार बना सकती है। लेकिन गाउट के अधिकतर मामलों में देखा गया है कि ये पैरों की उंगलियां, हाथों की उंगलियां , टखने और घुटनों में समस्या पैदा करती हैं। इसको नजरअंदाज करने पर ये आपको लंबे समय तक एक रोगी बना सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते इसकी पहचान कर इसका उपचार कराएं। लेकिन ध्यान रखें कि इसकी पहचान करने के लिए आपको इसके सही संकेतों का पता होना बहुत जरूरी है। जिससे की आप कुछ ही दिनों में इसकी पहचान कर इसका इलाज किया जा सकें। इसके मुख्य लक्षण हैं जैसे –

  • जोड़ों में लगातार दर्द रहना
  • दर्द वाली कुछ जगह पर स्किन लाल होना
  • जोड़ों में जलन पैदा होना
  • किसी भी हल्की चीज का भारीपन महूसस होना
  • प्रभावित जगह पर सूजन रहना
  • जोड़ों को हिलाने में परेशानी होना

यदि देखा जाए तो हमारे शरीर में अधिक यूरिक एसिड (uric acid) का जमा होना हमारे लिए काफी परेशानियों को पैदा करने का काम करता है, इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप अपनी बॉडी में यूरिन एसिड की मात्रा को हमेशा कंट्रोल रखें, साथ ही इसके कंट्रोल रखने वाली डाइट का सेवन करें।

अल्पकालीन और दीर्घकालीन गाउट (short term and long term gout )

गाउट को मुख्या तौर पर दो रूपों में बांटा गया है अल्पकालीन गाउट और दीर्घकालीन गाउट।

  • अल्पकालीन गाउट (Acute Gout) – अल्पकालीन गाउट, गाउट का एक दर्दनाक रूप है जिसमें रोगी के शरीर के 1-2 जोड़ प्रभावित होते हैं। रोगी इसके लक्षणों को केवल गाउट के अटैक के समय ही महसूस कर सकते हैं, जो आमतौर पर कुछ दिनों या सप्ताह तक रहता है और इसके बाद मरीज सहज महसूस कर सकते हैं। अगर अल्पकालीन गाउट का अटैक बार-बार हो रहा है तो ये दीर्घकालीन गाउट में भी बदल सकते हैं। 
  • दीर्घकालीन गाउट (Chronic Gout) – दीर्घकालीन गाउट में गाउट अटैक बार-बार आते हैं, इसमें 2 में अधिक जोड़ प्रभावित होते हैं। इसमें दर्द में केवल कुछ ही समय के लिए आराम मिलता है और अधिकतर लक्षण महूस होते रहते हैं। दीर्घकालीन गाउट जोड़ों की स्थायी क्षति और विकृति की वजह बन सकती है।

गाउट से जुड़ी कुछ अन्य स्थितयाँ (Other conditions associated with gout)

गाउट से जुड़ी कुछ अन्य स्थितियां निम्नलिखित है जैसे –

1. बार-बार होने वाला गाउट – कुछ लोगों को गाउट होने की बावजूद भी संकेत और लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और कुछ लोगों को एक साल में कई बार इसके लक्षण महसूस होते हैं। इस तरह के गाउट का इलाज दवाओं से किया जा सकता है। इसका समय पर इलाज कराना जरूरी है अन्यथा ये जोड़ की विकृति की वजह से बन सकता है।

2. विकसित या अग्रवर्ती गाउट – गाउट का समय पर इलाज नहीं किया जाता है तो ये विकसित हो जाता है और यूरिक क्रिस्टल शरीर के जोड़ों – हाथ की उंगली, पैर की उंगली आदि पर जम जाता है। इसी जमी हुई सरंचना को टोफी कहते हैं। टोफी आमतौर पर दर्दनाक नहीं होते है, लेकिन गाउट (Gout Meaning in Hindi) के अटैक के समय बहुत दिक्कते आने लगती है।

3. किडनी स्टोन – यूरेट क्रिस्टल से किडनी में स्टोन हो सकती है। इस पथरी को दवाओं या सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

गाउट अटैक को बढ़ावा देने वाले कारक (Factors that promote gout attack in hindi)

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गाउट अटैक को बढ़ावा देने के लिए कई ऐसा जिम्मेदार है जो कुछ इस प्रकारै है –

  • अत्यधिक वजन बढ़ना
  • हाई ब्लड प्रेशर 
  • अधिक शराब का सेवन
  • मोटापा
  • डीहाइड्रेशन
  • लंबे समय से किडनी की कार्य क्षमता में कमी आना
  • कुछ दवाओं का इस्तेमाल
  • सर्जरी या चोट के बाद

गाउट का इलाज और दवा

गाउट का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकते हैं। ट्रीटमेंट (Gout treatment in Hindi) के बाद आप महसूस कर सकते हैं कि दर्द और सूजन कम हो गई है और अगर आप हेल्थ लाइफस्टाइल अपनाते हैं तो भविष्य में होने वाले गाउट की समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

गाउट का इलाज करने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं जो कुछ इस प्रकार है –

  • नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लमेटरी दवाएं गंभीर गाउट का उपचार करने के लिए।
  • एनएसएआईडी के विकल्प के रूप में स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कॉलचिसाइन गाउट के दर्द को कम करने में सहायता करता है।
  • दवाएं जो ब्लड में यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करती है जैसे एलोप्यूरिनॉल, प्रोबेनेसिड और फेबक्सोस्टैट।

गाउट के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे (home remedies for gout treatment in hindi)

गाउट के इलाज के लिए निम्नलिखित घरेलू नुस्खे जैसे –

  • हमारे शरीर में कोई भी बीमारी न हो इससे बचने के लिए यूरिक एसिड के लेवल को 6mg/dl से नीचे ही रखना चाहिए। इसके लिए समय पर जांच कराते रहना चाहिए।
  • यूरिक एसिड अधिक होने पर किडनी की पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए ढ़ेर सारा पानी पीना चाहिए।
  • ब्लड शुगर को भी नियमित रूप से चेक कराते रहें।
  • ये बीमारी एक बार जिसको हो जाती है उनमें से लगभग 50 प्रतिशत में 6 महीने से 2 साल में दोबारा भी हो सकती है।
  • डाइट में फल सब्जियों और फाइबर युक्त अनाज का इस्तेमाल करें।
  • जंक फूड का सेवन कम से कम करें, हो सके तो बिल्कुल न खाएं।

गाउट में कैसा हो आहार? (What is the diet for gout in  hindi?)

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गाउट (Gout Meaning in Hindi) होने का मुख्य वजह खून में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ना, तो अब जाहिर है कि आहार वह होना चाहिए जिससे खून में यूरिन एसिड का लेवल कंट्रोल रह सके। क्या हैं वो खाद्य पदार्थ जो गाउट के मरीज को नहीं खाना चाहिए –

  • मांस खास कर लाल
  • कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बाबंद फल, आइसक्रीम जैसे उच्च फ्रूक्टोज वाले खाद्य पदार्थ जैसे – कॉर्न सिरप युक्त खाद्य पदार्थ 
  • बीय और मादक पेय
  • खमीर से बने खाद्य पदार्थ जैसे- ब्रेड आदि बेकरी उत्पाद
  • पालक, मटर, बीन्स और मशरूम जैसी सब्जियां
  • कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बाबंद फल, आइसक्रीम जैसे हाई फ्रुक्टोज वाले खाद्य पदार्थ जैसे – कॉर्न सिरप युक्त खाद्य पदार्थ
  • खास अंग का मांस जैसे – लीवर

गाउट में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ (foods to eat for gout in hindi)

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  • जितना हो सके पानी पिएं
  • कॉफी और चाय
  • विशेषज्ञ की सलाह अनुसार, हल्का प्रोटीन जैसे दालें और बहुत ही सीमित मात्रा में मछली और अंडे
  • लगभग सभी तरह के फल
  • अनाज और मांड (स्टार्च)
  • लगभग सभी तरह के फल
  • ऐसे डेयरी प्रोडक्ट जिनमेंं कम फेट हो जैसे – दूध, दही और पनीर
  • विटामिन-सी का सेवन जैसे संतरा, अनानास, स्ट्रॉबेरी, बेल पेपर, टमाटर और एवोकाडो।

यूरिक एसिड नियंत्रित रखने के उपाय (ways to control uric acid in hindi)

लाइफस्टाइल में थोड़े से बदलाव करने से ही आप गाउट के जोखिम कारकों से और इसके दोबारा अटैक के खतरों से बचा सकता है जैसे –

  • हाई लेवल के यूरिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें, इसके लिए आपको लाल मांस, बासी खाना, तेल से बनी हई मछली, समुद्री भोजन और खमीर उठने के बाद बनने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी का सही लेवल बनाएं रखने से आपके जोड़ों में क्रिस्टल बनने का जोखिम कम हो जाता है।
  • शक्कर युक्त पेय पदार्थ और स्नैक्स न खाएं, क्योंकि ये भी गाउट (Gout Meaning in Hindi) को बढ़ाने का काम करते हैं।
  • शराब का सेवन कम करें। बीयर और अन्य शराब के सेवन से बचें।
  • ये आपके शरीर के लिए जरूरी वजन को बनाएं रखें और संतुलित आहार का सेवन करें।
  • नियमित एक्सरसाइस करें और ऐसी गतिविधियों को करें, जो आपके जोड़ों पर अधिक स्ट्रेस न डालें।

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